तारडीह प्रखंड मुख्यालय मे विधयाक का समीक्षात्मक बैठक या औपचारिकता?

अलिनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक मैथिली ठाकुर का तारडीह प्रखंड मुख्यालय परिसर मे अधिकारियों के साथ हुई समीक्षात्मक बैठक एक बार फिर उसी पुराने सवाल को जिंदा कर गया—क्या ये दौरे समाधान के लिए होते हैं या सिर्फ दिखावे के लिए? तारडीह की सच्चाई किसी से छिपी नहीं है. वर्षों से प्रखंड मुख्यालय बिना अपने भवन के चल रहा है. भूमि कै तलाश प्रखंड बनने से लेकर अबतक जारी है. भूमि चिन्हित होती है. कार्य एक कदम आगे बढ़ता है फिर दो कदम पीछे हट जाता है. प्रखंड मुख्यालय का सरकारी कामकाज स्थापना से लेकर अबतक किसान भवन मे संचालित हो रहा है. सरकारें आई गईं प्रतिनिधि बदलते रहे लेकिन नहीं बदली तो प्रखंड मुख्यालय के लिए अपना भवन के लिए कोई ठोस कदम और न अधिकारी कर्मी के लिए आवास का ठिकाना.नतीजा—दूर-दराज़ से आना-जाना, और काम पर सीधा असर. सवाल ये है कि जब व्यवस्था ही बिखरी हो, तो विकास की बातें आखिर कितनी ईमानदार लगती हैं?
समीक्षा के दौरान क्या इन समस्याओं को स्पष्ट रूप से रखा गया? या फिर फाइलों में सब संतोषजनक दिखा दिया गया? अगर विधायक को वास्तविक स्थिति बताई गई होती, तो क्या बैठक के बाद कोई ठोस घोषणा, कोई समयसीमा सामने नहीं आनी चाहिए थी? या फिर यह भी एक तयशुदा पटकथा थी.अधिकारी बोलेंगे सब ठीक, और समीक्षा खत्म.
दरअसल, समस्या सिर्फ संसाधनों की नहीं, नीयत की भी है. वर्षों से लंबित भवन और आवास की समस्या यह साबित करती है कि प्रशासनिक प्राथमिकताओं में जनता की बुनियादी जरूरतें कहीं पीछे छूट गई हैं.निरीक्षण और समीक्षा की खबरें तो बन जाती हैं, लेकिन समाधान की कोई खबर क्यों नहीं बनती?तारडीह आज जवाब मांग रहा है.क्या यह दौरा बदलाव की शुरुआत है या फिर एक और खानापूर्ति? अगर जवाब पहले वाला नहीं है, तो यह साफ है कि सिस्टम अब भी खुद से ईमानदार नहीं है।

