अलीनगर अंचलाधिकारी की उदासीनता से अतिक्रमणकारियों की चांदी, नाला निर्माण ठप; जलजमाव से ग्रामीण त्रस्त

दरभंगा/अलीनगर। एक तरफ सरकार अतिक्रमण मुक्त सड़क, नाला निर्माण और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अलीनगर प्रखंड के धमसाईन गांव में प्रशासनिक उदासीनता के कारण सरकारी जमीन पर खुलेआम अतिक्रमण जारी है। हालत यह है कि अतिक्रमणकारियों के खिलाफ जांच, मापी और नोटिस की पूरी प्रक्रिया होने के बावजूद महीनों बाद भी कार्रवाई फाइलों में दबी हुई है। इसका खामियाजा आम ग्रामीणों को जलजमाव, बदहाल रास्ते और दुर्घटना की आशंका के रूप में भुगतना पड़ रहा है।मामला धमसाईन गांव स्थित पीडब्ल्यूडी मुख्य सड़क से जुड़ा है, जहां सड़क किनारे नाला निर्माण कार्य अतिक्रमण की वजह से अधर में लटका हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि अंचल प्रशासन की ढुलमुल कार्यशैली और राजनीतिक दबाव के कारण अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। परिणामस्वरूप बरसात शुरू होते ही सड़क और आसपास के इलाके तालाब में तब्दील हो जाते हैं।परिवादी इस्तियाज अहमद द्वारा अलीनगर अंचल कार्यालय में दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया था कि सरकारी सड़क की जमीन पर अवैध कब्जा कर दुकान, पक्का बाउंड्री और चापाकल तक लगा दिए गए हैं। शिकायत के बाद अंचल कार्यालय हरकत में तो आया, लेकिन केवल कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह गया। अंचल अधिकारी द्वारा कराई गई जांच एवं मापी में स्पष्ट रूप से सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट में मौजा धमसाईन, थाना संख्या-230, खाता संख्या-954, खेसरा संख्या-671 में निम्न अतिक्रमण दर्ज किए गए—मास्टर कलीम, पिता- मो. जैनुल हक पक्का बाउंड्री बनाकर लगभग 70 फीट × 5 फीट भूमि पर कब्जा। मो. समसुल, पिता- मो. आलिम
एस्बेस्टस का घर एवं पक्का बाउंड्री बनाकर 33 फीट × 5 फीट भूमि अतिक्रमित। मो. नफीस, पिता- मो. हुसैनी
एस्बेस्टस का घर एवं पक्का बाउंड्री बनाकर 38 फीट × 5 फीट भूमि पर कब्जा। मो. नफीस, पिता- मो. हुसैनी
एस्बेस्टस का घर बनाकर 15 फीट × 5 फीट भूमि अतिक्रमित। मो. नैब, पिता- मो. हुसैनी एस्बेस्टस का घर एवं पक्का बाउंड्री बनाकर लगभग 99 फीट × 3 फीट भूमि पर अवैध कब्जा।जांच रिपोर्ट के आधार पर अतिक्रमणवाद संख्या 07/2024-25 दर्ज कर नोटिस भी जारी किया गया, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रशासन खुद अतिक्रमण की पुष्टि कर चुका है, तो आखिर बुलडोजर चलाने में इतनी देरी क्यों? क्या प्रशासन किसी बड़े दबाव में है, या फिर सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को मौन संरक्षण प्राप्त है?ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी केवल नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं, जबकि जमीन पर स्थिति जस की तस बनी रहती है।नाला निर्माण बाधित होने से गंदा पानी सड़क पर फैलता है, जिससे स्कूली बच्चों, राहगीरों और दुकानदारों को रोज परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार छोटे-बड़े हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन की नींद अब तक नहीं खुली है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अविलंब अतिक्रमण हटाकर नाला निर्माण शुरू कराया जाए। साथ ही यह भी मांग उठने लगी है कि मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय हो, ताकि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को संरक्षण मिलने की परंपरा पर रोक लग सके।


