₹180 लाख की सड़क बनते-बनते बिखर रही — ढलाई के साथ ही फटती जा रही सरकारी योजना
ककोढ़ा पूर्व सदाय टोला से कमला बांध तक निर्माणाधीन सड़क में जगह-जगह दरारें,

फजले हक
दरभंगा/तारडीह-विकास के दावों के बीच ककोढ़ा पूर्व सदाय टोला से कमला बांध तक बन रही पीसीसी सड़क ने सरकारी निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगभग ₹180.456 लाख की लागत से बन रही यह सड़क अभी पूरी भी नहीं हुई है, लेकिन ढलाई के साथ-साथ कई जगहों पर लंबी-लंबी दरारें उभर आई हैं। हालात यह हैं कि एक ओर कंक्रीट डाला जा रहा है और दूसरी ओर वही हिस्सा टूटता दिखाई दे रहा है।यह निर्माण कार्य ग्रामीण कार्य विभाग, प्रमंडल बेनीपुर के अधीन कुंवर कंस्ट्रक्शन एजेंसी द्वारा कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण के कुछ ही दिनों के भीतर सड़क की सतह जगह-जगह फटने लगी, जिससे योजना की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत देखकर ऐसा लग रहा है मानो इसकी उम्र शुरू होने से पहले ही खत्म हो रही है।ग्रामीणों के अनुसार ढलाई में मानक मोटाई का पालन नहीं किया जा रहा और ढलाई के बाद पर्याप्त क्योरिंग (पानी देना) भी नहीं किया जा रहा है। कई स्थानों पर कंक्रीट सूखने से पहले ही दरक गया है। लोगों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर न नियमित तकनीकी जांच हो रही है और न ही विभागीय अधिकारी गंभीरता से निगरानी कर रहे हैं।
एक ग्रामीण ने नाराजगी जताते हुए कहा करोड़ों खर्च कर सड़क बनाई जा रही है, लेकिन बनते ही टूट रही है। अगर अभी यह हालत है तो बरसात में सड़क का क्या होगा?
वहीं दूसरे ग्रामीण बोले कि काम के दौरान कोई इंजीनियर नहीं दिखता। ठेकेदार अपनी मर्जी से काम कर रहा है और विभाग देख कर भी अनदेखा कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क बनने से पहले ही दरारें पड़ना भविष्य में बड़े नुकसान का संकेत है। इससे न केवल सरकारी राशि की बर्बादी होगी बल्कि ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी भी झेलनी पड़ेगी। यह सड़क क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जिससे किसानों, छात्रों और मरीजों की आवाजाही जुड़ी हुई है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कागजों में काम मानक के अनुसार दिखा दिया जाएगा, लेकिन जमीनी स्थिति अलग है। लोगों ने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच, गुणवत्ता परीक्षण और दोषी एजेंसी पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही सड़क की पुनः गुणवत्तापूर्ण ढलाई कराने की भी मांग की जा रही है।अब बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों की लागत से बन रही इस सड़क की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? यदि निर्माण के समय ही सड़क दरक रही है तो भविष्य में इसकी स्थायित्व पर गंभीर संदेह है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।



