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नफ़रत के दौर में इंसानियत की मिसाल

आज देश जिस सामाजिक और राजनीतिक दौर से गुजर रहा है, उसमें साम्प्रदायिकता की आग को हवा देने की कोशिशें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे समय में जब पहचान, आस्था और धर्म के नाम पर समाज को बाँटने का प्रयास हो, तब इंसानियत के पक्ष में खड़े होने वाले लोग उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं। उत्तराखंड के कोटद्वार में जिम ट्रेनर दीपक कुमार और कश्मीर के पहलगाम में आदिल हुसैन शाह, नज़ाकत अहमद शाह और  सज्जाद अहमद भट ऐसे ही उदाहरण हैं, जिन्होंने यह साबित किया कि भारत की असली आत्मा आज भी ज़िंदा है।उत्तराखंड के कोटद्वार की घटना में एक बुज़ुर्ग मुस्लिम दुकानदार को साम्प्रदायिक भीड़ से बचाने के लिए दीपक कुमार का आगे आना असाधारण साहस का परिचायक है। “मोहम्मद दीपक” बताकर उन्होंने न केवल उपद्रवियों को रोका, बल्कि यह सशक्त संदेश भी दिया कि इंसान की पहचान धर्म से नहीं, कर्म से होती है। इस घटना के बाद दीपक के ख़िलाफ़ कार्रवाई और दबाव की खबरें चिंता पैदा करती हैं, क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नफ़रत फैलाने वालों पर सख़्ती होनी चाहिए, न कि उन्हें रोकने वालों पर।इसी तरह पहलगाम में हुआ आतंकी हमला मानवता को झकझोर देने वाला था। उस भयावह क्षण में आदिल हुसैन शाह ने पर्यटकों की जान बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। नज़ाकत अहमद शाह और सज्जाद अहमद भट ने घायल पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाकर यह दिखा दिया कि कश्मीरियत का असली अर्थ आपसी भाईचारा और मेहमाननवाज़ी है। इन लोगों का धर्म नहीं, बल्कि उनका साहस और मानवीय दृष्टि याद रखी जानी चाहिए।ये घटनाएँ हमें आत्ममंथन के लिए मजबूर करती हैं। क्या हम नफ़रत के सामने खामोश रहेंगे, या इंसानियत के पक्ष में खड़े होंगे? अक्सर देखा गया है कि भीड़ का डर लोगों को चुप करा देता है, जिससे उग्र तत्वों के हौसले बढ़ते हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि समाज की दिशा वही लोग तय करते हैं, जो अन्याय के ख़िलाफ़ खड़े होने का साहस रखते हैं।आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर ऐसे नागरिकों को संरक्षण और सम्मान दें। क़ानून का इस्तेमाल नफ़रत और हिंसा फैलाने वालों के विरुद्ध हो, न कि मानवता की रक्षा करने वालों को दबाने के लिए। भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताक़त है। अगर हमें लोकतंत्र और संविधान को बचाए रखना है, तो इंसानियत को अपना साझा धर्म मानना होगा। नफ़रत के इस दौर में यही रास्ता देश को शांति, सद्भाव और एकता की ओर ले जा सकता है।

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